रेइकी
को समजने के लिए हमे अपने शरीर
को समजना जरूरी हें जिसके लिए
ये जानना आवश्यक हें की हमारे
कितने शरीर हें|
हम
हमारे जिस शरीर को देख शकते
हें उसे स्थूल शरीर कहेते हें
और उसके बहार छे शरीर हें जो
हम अपनी नोर्मल आँखों से नही
देख शकते,
जो
इस प्रकार हें,
१.
स्थूल
शरीर –
PHYSICAL BODY
२.
प्राण
शरीर –
ETHRIC BODY
३.
मनोमय
शरीर –
MENTAL BODY
४.
भाव
शरीर –
EMOTIONAL BODY
५.
चैतन्य
शरीर –
SPIRITUAL BODY
६.
सूक्ष्म
शरीर –
ASTRAL BODY
७.
निर्वाण
शरीर –
CELESTIAL BODY
स्थूल
शरीर के बहार के ६ शरीर को हम
आभा (AURA)
के
नाम से जानते हें|
स्थूल
शरीर के बाद आनेवाले प्राण
शरीर के ऊपर ७ चक्र आते हें|
यह
७ चक्रो के साथ पूरा शरीर जुड़ा
हुवा हें|
इसलिए
अपने मनोमय शरीर में पैदा
होनेवाले हरेक विचार इस प्राण
शरीर के द्वारा हमारे स्थूल
शरीरमें पहोचता हें|
जिससे
हमारे हकारात्मक और नकारात्मक
विचारो की हमारे शरीर पर असर
होती हें|
हमारे
प्राण शरीर में ७ मुख्य चक्र
आते हें|
१. मूलाधार चक्र
२.
स्वाधिस्ठान
चक्र
३.
मणिपुर
चक्र
४.
अनाहत
चक्र
५.
विशुध्ध
चक्र
६.
आज्ञा
चक्र
७.
सहस्त्रार
चक्र
एसा
कहा जाता हें की किसी एक चक्र
में अगर नेगेटिविटी आती हें
तो उसके तुरंत बाद के चक्र में
भी अवरोध आता हें|
इसलिए
समयांतर पर हमे हमारे चक्र
को साफ़ करते रहेना चाहिए|
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